Wednesday, April 2, 2025

संवाद

एक विस्मित सा संवाद था उसकी आयतों कारीगरी में l

केशों गुलाब लिखी जैसे कोई ग़ज़ल थी उसकी अदाकारी में ll


रूह महकी थी जिन अधूरे खत भींगी आँचल साझेदारी में l

नफासत नजाकत लाली शामिल जिसकी रुखसार तरफदारी में ll


काफिर महकी आँखें पेंचों उलझी जिसकी रहदारी में l

उत्कर्ष स्पर्श था उसकी चंदन बिंदी पहेली रंगदारी में ll


दार्शनिक सी उसकी गलियों की वो टेढ़ी मेढ़ी पगडण्डियाँ l

जुस्तजू गुलदस्ता कहानियां पिरोती कर्णफूल आसमानों की ll


इस खामोशी स्पन्दन से गुदगुदा करवटें बदलती आरजूएँ l

तस्वीर नयी सहर रंग गयी बैरंग खत पन्नों रुकी कूँची राहों में ll

Sunday, March 2, 2025

अमोघा

साँझ धूनी चंद्र घटा नीले रक्त आवेग संगम l

कल्पवास लीन बिंदी माथे चंदन तारों घूंघट ll


मंथन तट सुरमई रंग रंगी मुद्रि अनोखी बंधन l

मधुमास रुचिर कंचन काया पूर्णाहुति सुंदर ll


बाँध अर्पण अश्वमेघ मन्नत डोरी धरा तर्पण l

क्षितिज लालिमा कामिनी जोहर अभिनंदन ll


चंचल युगम तृष्णा मरूभूमि त्रिशंकु अम्बर l

मेघों आँखों लुप्त मृगतृष्णा काले सायों अंतर ll


क्षीर वचन मंत्र सूत्र केश धूलि त्रिवेणी संगम l

कायनात सृष्टि अमोघा परिणय पावन संगम ll

Saturday, February 1, 2025

जंग

अर्से बाद आईने नज्म उतराई जंग लग गयी पहलू इन रस्मों को l

संदूक बंद लिहाफों से कतरा कोई बह चला आँखों यादों को ll


नब्ज रज्म रिवायत तहरीर आईने उलझी रह गयी इस तारीख को l

सोंधी सोंधी खोई खुमार इसकी रुला गयी यादों दर्पण आँचल को ll


गर्त गुब्बार ढका माहताब मोहताज हो गया झरोखे बादल को l

ग्रहण दीमक जंग सा डस गया आईने इस गुलजार आँगन को ll


फेहरिस्त ख्वाबों अरमानों धूमिल आईने सेज आसमानों को l

मेघ बूँदों तेजाब टपकती बदरंग करती यादों लिखावट स्याही को ll


फ़ाँकी धूल रूह कहानी को पाया जंग लगी यादों आईने रूहानी को l

जाने कब किश्त किश्त बिक गयी लेखनी पतवार खारे सागर पानी को ll

Saturday, January 4, 2025

जौहर

जलती धरा विरह बिछड़न को l

जतिंगा रुन्दन परिंदा अग्नि को ll


सजती जौहर सेज बरस दर बरस l

शरद अमावस हर काली रातों को ll


बरबस इतिहास पृष्टभूमि खोल जाती l

गाथा पद्मिनी संग कुनबे जौहर को ll


सामुहिक क्रंदन विचलित कातर तम l

सहमा कायनात इस भयावह मंज़र ll


विभोर आकर्षित चातक जतिंगा घाटी को l

रहस्य नैसर्गिक मध्य विधमान तरंगों को ll


कुनबा जतिंगा परिंदा अंतिम साँसों को l

जौहर अग्नि शिखा आहुति तिलिस्म को ll


जलती धरा विरह बिछड़न को l

जतिंगा रुन्दन परिंदा अग्नि को ll

Thursday, December 5, 2024

दर्द

रज़ा दर्द की भी सिर्फ साँसों पर फिदा l

साँसे भी मुकम्मल इसी दर्द की वज़ह ll


अंदाज फिराक दर्द सज़ा अह्सास का l

अर्जी मुनासिब इसके रंग गुलनार का ll


तरजीह दर्द तामील अधूरे ख्वाब का l

बुनियाद दर्द की काँटों संग गुलाब का ll


नियति दर्द रज़ा बिखरी जन्म महताब का l

साँसे कोरी रुखसत कैसे दर्द गुलाब का ll


दर्द शून्य ढाई आखर साँसों रुखसार का l

फिदा कायनात पर दर्द साँसों अहसान का ll


अकेली साँसें आयतें बँधी दर्द इश्क डोरी से l

मुकम्मल दर्द रूह रूमानियत इसी डोरी से ll