RAAGDEVRAN
POEMS BY MANOJ KAYAL
Tuesday, July 10, 2012
किताब
किताब जिन्दगी की रंगीन थी
पर वो किताब अधूरी थी
कुछ पृष्ट रिक्त थे
चाह कर भी जिनमे रंग ना भर पाया
मुस्कराहट के पीछे छिपे आंसुओ को
शब्दों में वयां ना कर पाया
किताब के ह़र पन्ने को भर ना पाया
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