RAAGDEVRAN
POEMS BY MANOJ KAYAL
Sunday, July 25, 2010
दूर
संभल पाती सहज पाती जिन्दगी
दबे पावँ ख़ामोशी से
चली आयी एक खबर
आहिस्ते से दी दिल पे दस्तक
मुसाफिर तेरी मंजिल है अभी दूर
मत बुन सपने आशियाँ के यहाँ
जाना है तुझको बहुत दूर
जाना है बहुत दूर
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