तू ही मेरी वो पाठशाला जिस नदी का मैं ठहरा हुआ किनारा l
संभली नहीं किताब वो कभी अक्स तेरा जिसमें लगे पुराना ll
पेंसिल से नाम मेरा लिख मिटाना दूरियाँ चाँद फासलों समझाना l
लिखावट सी बन गयी वो मेरी साँसों रूह ज़िल्द कागज पन्नों की ll
बेमिसाल नादानियाँ तेरी गिली रेत बनाते महल चित्र आकारों की l
अमिट छाप मोहर बन गयी इस शागिर्द के बचपन मुलाक़ातों की ll
तू ही मेरा आसमाँ तू ही चाँदनी इस बंजर पहेली आरज़ू की l
अनछुआ स्पर्श भीगते बारिश तेरी बनाई कागज कश्ती की ll
रेखा लकीरें छांव सी यादें मुलाकातें तेरे सूखे गुलाब खुशबु की l
मधुशाला कस्तुरी बन गयी वो मेरी आलिंगन अलबेले साँझ की ll