Tuesday, March 10, 2026

नीलामी

कल बाजार वो मुर्दों का श्मशान सटोरियों को नीलामी बेच आया l

मजमा लगा कब्जे का कब्र खोद चिताओं का आसमाँ बेच आया ll


बेख्याली काफिर नींदों दुनिया को ख्वाबों खिलोनों रूप दे आया l

शून्य मझधार कठपुतली स्वाँग रचा दर्पण प्रतिबिंब रूप दे आया ll


खुशबु चंदन सजा भस्म चिताओं सौदा आकंठ लालच से कर आया l

हुनर जौहरीयों को टूटे आईने स्वप्निल चमकता इश्तहार बेच आया ll


अनुबंध टूटा जो साँसों से बंजारी धड़कनों को दफन कर आया l

ख्यालों अह्सास परे जिंदा मुर्दों को मुर्दों का श्मशान बेच आया ll


हर पायदान कहानी नई बुन ठगों बीच सूनी सी पदचाप छाप छोड़ आया l

आहट द्वारे मोक्ष कांपते हाथों रूहों तिलांजलि दे अशर्फीयाँ खरीद लाया ll

Wednesday, February 4, 2026

पीताम्बरी

गोधूलि साँझ रिमझिम ओस लटों सेज क्षितिज धरा बेलों लाली से l
मिट्टी धागों कायनात निखर आयी थी बुनकर चरखे सायों स्याही से ll


कोरे सादे कागज मिथ्या सत्य सी खोई थी परछाई कपोल नजारों से l
इशारों महकी उल्फतों ने लिख डाली सौगात आयतें महताब लाली से ll


झूम उठीं कठपुतली पीताम्बरी रिमझिम रंगीन बदरी बरसातों से l
फिसलती अंगुलिया अंगड़ाई काश्तकारी ने पायदान रंगी रूहानी से ll


जुस्तजू रूह बँधी थी जिन पतंगे पेंच गजलों बाज निगाह कहानी बंदगी से l
जिक्र उस आरज़ू सहर बदनाम हो गयी दीवारों की कानाफूसी गुफ़्तगू से ll


मेघों हिलोरी आतिशबाजी से कूची रंग भर गयी आसमाँ कला बाजी से l
इन कड़ियां अठखेलियों से कहानी एक नयी पपोल आयी पीपल पीछे से ll

Saturday, January 17, 2026

ll धैर्य ll

हौसला रख संघर्ष कर हर कदम अपने आप से l
थकना नहीं रुकना नहीं हार कभी नियति सामने ll


कर नजरअंदाज अपूर्णता थाम निपुणता कला हाथ में l
लक्ष्य मंजिल दूर हो के भी दूर नहीं रख ज़ज्बा साथ में ll


बदल लकीरें हाथों की रेखाएं मस्तिष्क ललाट की l
विधि विधमान विराजेगी बदल तकदीर ज्वार में lI


अर्पण होगा जीवन जब सीखने खुद की खामियों पास में l
लक्ष्य हिमालय बेंध जायेगा अर्जुन सरीखे प्रतिबिंब छांव से lI


अमूल्य हैं समय कोई दूजा तेरी साँसों वरदान सा तुल्य नहीं l
अंधेरे कभी डरना नहीं मिलेगी विजय विचलित तू कभी होना नहीं ll


विचलित तू कभी होना नहीं, विचलित तू कभी होना नहीं ll

Sunday, January 4, 2026

महासमर

तहजीब बाजीयाँ मोगरा गुलाब कांटों खुशबुदारी की l

कायनात सहर भीगें नयनों अक्स ओस पहरेदारी की ll

 

स्वरांजलि दीप ध्वनि हिम पटल शिखर लहर मझधारों की l

गाथा चिंतन कहानी नयी बादलों के स्वरूप संसारों की ll

 

अंतरंगी धागे प्रचंड अलाव तपिश सुनहरी धूपों की I

क्षितिज मेरुदंड गुँथ रही इन्द्रधनुषी वैतरणी अनुरागों की ll

 

लिपिबद्ध हो केशवों झांझर मेहंदी पंखुड़ि हाथों की l

कह रही नयी चेतना काफिर आवारा हवाओं की ll

 

ख्यालातों के खाली ज़िल्द पर पानी स्याही अल्फाजों की l

लिख गयी नाजुक गठबंधन महासमर प्रयासों की ll

 


Sunday, December 21, 2025

पंजरी

सर्द हवाएँ ख़यालों होले से झूमकौ फुसफुसा गयी एक मिठी सी राग l

नाजुक हवाएँ पूछ रही पता उस अक्स तलब जिसकी थी कभी पास ll

 

कानाफूसी रूमानियत थामी थी सोंधी सोंधी पंजरी सी मुस्कान l

परिचय पूछ रहा अल्हड काजल कहा छुपी थी आँचल मनुहार ll

 

सौम्य काव्यअग्नि रूप सृष्टि माथे ललाट प्रतिबिंब चंदन आकार l

गुँथे घूंघट पीछे सहज संक्षेप लिख गयी एक सांची चंद्र आधार ll

 

उलझा बिखरी केश लट्टे वेणी सी सज गयी सुरमई साँझ कर्णताल l

सलाह चंचल गुदगुदी पायल सुना रही कोई सुन्दर कहानी संसार ll

 

कानाफूसी बीचों बीच थम थम बरसी जोगन सी मेघ सुर करताल l

ओस बूँदों ढ़की पलकें शागिर्द सी नाच उठी नींद सिरहानों साथ ll