Thursday, May 21, 2026

वैतरणी

लाजमी थी गलतफहमियां मधुशाला क़ुरबत आलिंगन हाथ में l

मदहोश थी दहलीजें इसकी नजदीकियां अफ़साने आँगन खास में ll


रंग ज़माने खुदगर्जीयों के थे बहरूपिये मयखाने सरूर रफ्तार में l 

नाजुक थी कड़ियां इसके मजहब तालीम छलकते जामों प्याम में ll


पूरी थी जिन्दगानी इसकी रूह कडियों महफ़िलों सजती शाम में l

शून्य भी शृंगार सा था इसके कायनात पटल चमकते अर्ध चाँद में ll


इन्द्रधनुषी पगडण्डियाँ सी रोशनी मधुशाला छलकते नयनों खोये जाम में l

तर गयी कंठ वैतरणी भूल काफिर पीड़ा सुरा के अस्तित्व खोई दालान में ll


मीमांसा फिर पहरेदारी थी मदिरा की अनकही प्रतिक्रिया समीक्षा राज में l

जीना फिर से सीखा गयी इसकी तवायफ कोठी अपने आँचल अंदाज़ में ll

Thursday, May 7, 2026

आलिंगन

तू ही मेरी वो पाठशाला जिस नदी का मैं ठहरा हुआ किनारा l

संभली नहीं किताब वो कभी अक्स तेरा जिसमें लगे पुराना ll


पेंसिल से नाम मेरा लिख मिटाना दूरियाँ चाँद फासलों समझाना l

लिखावट सी बन गयी वो मेरी साँसों रूह ज़िल्द कागज पन्नों की ll


बेमिसाल नादानियाँ तेरी गिली रेत बनाते महल चित्र आकारों की l

अमिट छाप मोहर बन गयी इस शागिर्द के बचपन मुलाक़ातों की ll


तू ही मेरा आसमाँ तू ही चाँदनी इस बंजर पहेली आरज़ू की l

अनछुआ स्पर्श भीगते बारिश तेरी बनाई कागज कश्ती की ll


रेखा लकीरें छांव सी यादें मुलाकातें तेरे सूखे गुलाब खुशबु की l

मधुशाला कस्तुरी बन गयी वो मेरी आलिंगन अलबेले साँझ की ll

Saturday, April 18, 2026

पारिजात

अक्सर आधी चाँदनी रातों को बाहें फैला आसमाँ से बातें करता हूँ l

कहानी उसके गजरे खुशबु की पारिजात को सुनाया करता हूँ ll


ललाट पर बिंदी की वो मोहर गालों की रुखसार बताया करता हूँ l

बालियों की धड़कनों से उसकी लहराती केश लट्टे उलझाया करता हूँ ll


नमी उसके आँखों की अपने काजल से पलकों बंद कर लेता हूँ l

डोरी उसके दिल पतंगों की दूसरी मांझे पेंचो से बचाया करता हूँ ll


तारूफ सुन उस चाँद की पता पूछने लगा आसमाँ चाँद भी l

कहा ठहर कोरी कल्पना नहीं घूंघट हटा दिख जायेगा पास अभी Il


तूने इत्र सा महकाया आँचल छोर बना राधा प्रेयसी रूप जिसका l

ये चाँदनी सहेली पता ना पूछ उस पागल चितचोर दिल तरन्नुम का ll

Wednesday, April 8, 2026

अलमारी यादों की

हृदय वात्सल्य स्पन्दन बादलों कश्ती सवार क़ुरबत खोजे तेरे पहलू पास l

एहसास बंदगी आरज़ू फलसफा भूली देख फरिश्तें आयतें गहराई साथ ll


खामोश गुजारिशें अल्फाजें आफताब जुस्तजू हसरतों मेहंदी रातों की बात l

मासूम स्वप्निल इश्क मुख्तसर क़ासिद भेजे ताज महल सी फरियादी आस ll


गुस्ताखियां नाजुक लबों खोई कोई कमसिन सुनहरी जादुई आवाज l

मुन्तजिर तलाश रही फासलों रुकी हर लहजे सुकून भरी वसल आगाज ll


दिवास्वप्न सरगोशी सी गूँजती मेघ मल्हारों तरुणी सोंधी सोंधी तरंग मुस्कान l

कई खतों पैगाम बादलों ने लिख भेजे आगोश सितारों आरज़ू माहताब नाम ll


अलमारी यादों की गुफ़्तगू करती लकीरें हाथों फकत रहनुमों बरसातों साथ l

रिवायतें साहिलों की तोहफा नजराना दे आयी तेरे पाकीजा नूर अंदाजों साथ ll

Tuesday, March 10, 2026

नीलामी

कल बाजार वो मुर्दों का श्मशान सटोरियों को नीलामी बेच आया l

मजमा लगा कब्जे का कब्र खोद चिताओं का आसमाँ बेच आया ll


बेख्याली काफिर नींदों दुनिया को ख्वाबों खिलोनों रूप दे आया l

शून्य मझधार कठपुतली स्वाँग रचा दर्पण प्रतिबिंब रूप दे आया ll


खुशबु चंदन सजा भस्म चिताओं सौदा आकंठ लालच से कर आया l

हुनर जौहरीयों को टूटे आईने स्वप्निल चमकता इश्तहार बेच आया ll


अनुबंध टूटा जो साँसों से बंजारी धड़कनों को दफन कर आया l

ख्यालों अह्सास परे जिंदा मुर्दों को मुर्दों का श्मशान बेच आया ll


हर पायदान कहानी नई बुन ठगों बीच सूनी सी पदचाप छाप छोड़ आया l

आहट द्वारे मोक्ष कांपते हाथों रूहों तिलांजलि दे अशर्फीयाँ खरीद लाया ll